उलझनें
लोग छूटते जाते हैं, जगह बदल जाती है और आप खड़े रह जाते हो उसी पुरानी जगह पर की शायद कोई जादू हो जाए और फिर सब यथावत हो जाए पर ये कभी नही होता और आप बस वहीं खड़े रह जाते हो किसी के न आने के इंतज़ार मे। ऐसा नहीं है की इस परिस्थिति मे अवसाद नही होगा, दुख और तकलीफ नही होंगे लेकिन आप अगर उनकी याद को ही अपना वर्तमान बना लेंगे तो बेशक आप एक भूल भुलैया मे फँस जाएंगे। पता है लोग न मजे लेते हैं की देखो वो मेरे इंतज़ार मे पड़ा है रो रहा है, तड़प रहा है उन्हे आपकी पीड़ा मे एक आनंद प्राप्त होता है वो चाहते हैं की आप ऐसे ही परेशान होते रहें, आप जो सहानुभूति की अपेक्षा रखते हैं वो उन्हे कभी महसूस नही होती तो बंधु मेरे बंद करो ये नौटंकी, तुम खुद मे ही पूर्ण हो, खुश रहने की पूरी काबिलियत है तुम्हारे पास