अहा जिंदगी।
जीवन की सार्थकता तभी है जब आप अपने घर परिवार के साथ शान्त मन से थोड़ा समय बिताते हुए दो निवाला खा सकें,आपके बच्चे आपके कहने में हों और परिवार साथ।आज के समय ने इनको सीमित कर दिया है परिवार तोंपहले से दूर है और बच्चे अपने जीवन में तो जीवन की सार्थकता आकर सिमट जाती है अगर आपकी पत्नी आपके साथ खड़ी है मन से, आपके हरेक कदम पर आपका हम साया बनकर ,जब सारे रिश्ते दम तोड़ देते हैं तब भी पत्नी आपका आधा हिस्सा बनकर जीती है
,लेकिन तब क्या जब आपकी पत्नी आपकी अहमियत खत्म कर दे?
आपसे ज्यादा उसे खुद का जीवन अलग महत्वपूर्ण लगने लगे?
आपसे इतर होकर भी उसे अपने भीतर किसी तरह का दर्द न हो ,कोई संवेदना न जगे? आपके दर्द आपकी पीड़ा को वो अगर एक दर्शक बनकर ही देख पाए?
आपकी अहमियत उसके बाकी जीवन की चीजों से कमतर हो जाए ?
फिर आप यूं समझो आपका जीवन व्यर्थ है।आप चाहे जीवन में कुछ भी आला कर रहे हों आप इस धरती के निम्न कोटि के प्रजाति से भी निम्न हो।
प्रेमचंद बहुत बड़े गल्प रचयिता थे मानव जीवन के सभी उतर चढ़ाव को बारीकी से देखा था उन्होंने लेकिन क्या हुआ कि जब उनकी शादी एक कर्कशा से हो गया और पूरा जीवन नष्ट हो गया, जो मौत प्रेमचंद को मिली उसमें उस स्त्री का हाथ होना कहीं से नकारा नहीं जा सकता,
शिवरानी देवी क्या ही कर लेती जब उनके जीवन के उत्कृष्ट समय को ही उस कर्कशा ने ग्रस लिया था
हमने अपने पिछले पीढ़ी को देखा है, अगर पति को कोई भी जरूरत हो तो चाहे पूरा घर सोया पड़ा हो हमने पत्नी को उसके पहले जागते हुए देखा है, उसकी फिक्र करते हुए देखा है।
किसी घर में शादी के अगले सुबह जब सब लोग बेहोश पड़े हुए होते थे तब भी जाते हुए पति को समान सहेज कर देने का काम पत्नी का ही होता था,भले उसकी आँखें जल रही होती हों।
सच में जीवन का आयाम पूरी तरह से निर्भर करता है कि आपका जीवनसाथी कौन है, आप जीवन के उत्तरार्ध में एक गहरी सांस के साथ,सपत्नीक कभी खुद से बैठे बैठे शांति के साथ ये बुदबुदा पाएंगे या नहीं कि ""अहा ये एक अच्छा जीवन रहा और आपके आधरों पर ये सोचने के क्रम में एक मुस्कुराहट दौड़ जाएगी, नहीं तो कहीं दुनिया विरक्त होकर एक कड़वाहट कसैला मन लिए भटकती हुई रह बनकर रह जाएंगे।
आजकल जो महसूस होता है जिसमें न तो रूहानियत फिक्र और खयाल है ,पति बस एक स्टेटस सिंबल बनकर रह गए हैं ,बाहर जाकर सारी चर्चा पति के नौकरी पर ही घूमेगी की कैसे इनके साथ ये हुआ वो हुआ, उसके करना मेरा लाइफ तो ऐसा हो गया वैसा हो गया लेकिन जब पति सामने हो तब इनका वैल्यू सिस्टम हैंग हो जाता है ,रहना सबको आज के समय में पति के साथ है, दलीलें भी यही दी जाएंगी कि आपकी बड़ी फिक्र होती है हमें इसीलिए साथ रहना है लेकिन जब साथ में हो तब इनकी फिक्र जो दिखती है क्या कहने आपका जॉब है आपकी नौकरी है आपको तो झेलना ही है मेरे तक अपनी परेशानी की vibes भी आनी चाहिए ,
आप चाहे आग में झुलस रहें हों लेकिन ये तो आपका नौकरी है तो उसका टेंशन आप मुझे मत दिखाइए
आप मेरे साथ रोबोट बन जाइए घर आइए तो बस मुस्कुराते हुए ही मेरी हरेक बात पर मुहर लगाइए क्योंकि मैं तो सब कुछ छोड़कर आपके पास आई हूं ।
आपको सुबह जल्दी जाना है ,नाश्ता ले जाएंगे क्या ?
नहीं नहीं ले जाऊंगा वहीं खा लूंगा ,
अच्छा ठीक है
ये है इनकी फिक्र, आप बाहर खा लीजिए क्योंकि मैं सुबह नहीं जग सकती ,अरे यार इसीलिए तो ससुराल छोड़कर आपके साथ रहने आई हूं आपकी फिक्र करना और आप इतना भी नहीं कर सकते ।
घर में न झूठ बोल दीजिए ताकि मुझे कुछ न बोल पाए कोई ,
आपको मैनेज करना बहुत आसान होता है इसीलिए ये सब आपके साथ रहने का ढोंग करती है जिसमें की इनको उस दौर की महिलाओं की तरह फिक्र न करना पड़े दिखावे के लिए क्योंकि फिक्र तो उन्हें आपसे ज्यादा फिक्र मोबाइल की होती है ,आपसे मिले तबज्जों को समाज में भुनाने की होती हैं
मेको अपनी पसंद के कपड़े पहनने हैं चाहे उनमें भौंडापन क्यों न दिखे क्योंकि इट्स माय लाइफ ,माय शौक
ये स्तर है आजकल इन औरतों का,
अगर ये कभी पुरुष की नजर से देख लें अपनी इन्हीं हरकतों को तो इन्हें समझ आएगा कितनी ओछी लगती है
इन्हें गरिमा बनानी नहीं आती बस सबसे कम समय में कोई मुझे recognise करे बस इसकी ललक बनी होती है।
स्त्रियों को मां कहा जाता है लेकिन वो औरतें उस गरिमा को कमांड करती है उसके लिए त्रिया चरित्र नहीं करती।
जो भी है अगर आप भी इसी तरह के पार्टनर के पति हैं तो अपना भी मुबारकबाद।
ये औरतें हैं जो अधेड़ होकर भी अपनी उम्र नहीं समझ पाती और ऐसी हरकतें करती हैं जिनसे घिन आती हैं
और तब ये चाहती हैं कि पुरुष समाज इन्हें सती अनुसुइया का दर्जा दे।ये तब रोटी हैं पछताती हैं लेकिन तब कुछ नहीं बचता इनके पास क्योंकि चाहे कोई भी पुरुष कितना भी मॉडर्न बनाकर दिखा दे पत्नी के रूप में उसे पत्नी ही चाहिए कोई रोड छाप नहीं
चलिए आप भी आनंद लीजिए फिलहाल मैं तो बहुत ले रहा हूं इस जीवन का ।
कभी मौका मिलेगा किसी जन्म में तो शैशव के बाद सीधे वैराग्य ही चुनूंगा।
।।पटाक्षेप।।
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