आत्मचिंतन

अकेले हो? 
अकेले हो तो व्यथित क्यों हो,ऐसा क्यों खुद को महसूस करवा रहे हो जैसे तुम्हारा वजूद ही खत्म हो गया।इस शानदार समय और परिस्थिति को पहचानने में तुमसे भूल कैसे हो रही हैl 
ईश्वर ने तुम्हे कितनी मजबूती से बनाया है की उसे भरोसा है तुम नही टूट सकते और तुम महज अकेले होकर व्यथित हो रहे हो ,वो भी तब जब तुम्हे ज्ञात है किसी भी नई जगह पर जाने के समय तुम अकेले ही होते हो ,सारे रिश्ते तुमने यहीं आकर बनाए हैं और जब तुम्हे वहां से जाना होगा तब भी तो सारे रिश्तों को छोड़कर ही जाना होगा तब की व्यथा तो फिर भी  समझ आती है लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में अगर तुमने अकेले होने से डरने लगे तो लोग तुम्हारी इसी कमजोरी का फायदा उठाएंगे,तुम्हे हमेशा डराएंगे की तुम्हे हम छोड़ देंगे अकेले और तुम उनकी उचित अनुचित सारी बातों को सहते रहोगे बस इसी डर से की तुम्हे अकेलापन काटता है।

जिस दिन तुमने अकेले होने को अपनी कमजोरी नहीं अवसर बना लिया तब उस दिन से सारे समीकरण बदल जाएंगे,उन्हें इस बात से तकलीफ होगी की तुम उनके इर्द-गिर्द क्यों नही नाच रहे हो, तुम्हे खुश देखकर उन्हें खुद के सारे प्रयास विफल नजर आएंगे और तब तुम्हे खुद को खुश रखने के लिए किसी के साथ की आवश्यकता नहीं होगी ,यूं कहो तो तुम्हे तब अपना अकेलापन व्यक्तिगत समय के रूप में नजर आएगा ।

अपेक्षाएं दुख का एक विशेष कारण है ,हर वो व्यक्ति और परिस्थिति जो आपको तनिक भी संतप्त करता है उसे त्यागने में आपको तनिक भी संकोच नहीं होना चाहिए और अगर आपने किसी से भी कोई अपेक्षा की होगी तो उसे त्यागना आपके लिए मुश्किल हो जाएगा,अतः किसी का इंतजार मत कीजिए,किसी की उम्मीद मत कीजिए ,खुद को खुश रखने के लिए आप स्वयं पर्याप्त हैं तो उस क्षमता को पहचानिए और उस छुपे एहसास से खुद का साक्षात्कार कराइए।

हरेक व्यक्ति में असीमित क्षमताएं निहित हैं उसे जानकर प्रयोग में लाना और खुद को प्रसन्न रखना ही जीवन का उद्देश्य है।
जिस व्यक्ति ने आपको किसी भी नकारात्मक भावना से एक बार भी आपके हृदय को क्लेशित किया हो उसे आपके मन में प्रवेश पाने का कोई हक नही रह गया है। 

किसी के लिए भी हमेशा उपलब्ध रहना आपकी अहमियत को कम करता है इसीलिए खुद की वैल्यू करें आपको खुद को कष्ट देकर दूसरों को खुश करने का कोई हक नही है ,जो नकारात्मकता आप खुद को नही देते वो दुसरा कोई भी आपको नही दे सकता।

वैसे भी दिनकर ने कहा है ,क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो।

यहां गरल से तात्पर्य आपके अंदर की क्षमता है जिसके कारण आप खुद को सत्कार का पात्र बना सकते हैं।

उठो ,जागो और अपना विकास करो ताकि कोई तुम्हारा फायदा नहीं उठा सके।


सत्यम


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