काश्वी ( फ्रॉम डैड )
सैनिक अस्पताल
पटना
ये किस एहसास से गुजर रहा हूं ,जैसे लग रहा की कुछ डूब रहा भीतर भीतर,दिल भारी लगना आज एक मुहावरा न लगकर एक एहसास बनकर मरोड़ रहा है ,तेरी पहली दीवाली और मैं तेरे पास नहीं हूं, कोई नहीं समझ सकता हम दोनों के अलावा की इस मर्मांतक वेदना का क्या स्तर है।
तेरा वो नन्हे नन्हे हाथ पैरों को फेंकना ,होठों को बार बार घुमाना और अपने नन्हे नन्हे हाथों को सर के ऊपर उठाकर अंगड़ाई लेना, कितना सुकून देता है इसका कोई शब्द नहीं है मेरे पास,
तेको छाती से लगाकर सोना जब तू अपनी छोटी छोटी उंगलियों से मुझे स्पर्श करती हो ,स्वर्गीय सुख की अनुभूति देती है।
तेरे बालों से आती वो महक जिसको मैं अपने अंदर खींचकर स्थाई रूप से भर लेने की असफल कोशिश करता हूं ,नथुनों में तो वो महक स्थायित्व नहीं ले पाती लेकिन मन में उसकी याद एक बेचैन मुस्कुराहट दे जाती है।
तेरा वो अपनी नहीं उंगलियों से मेरे उंगली को जोर से भींचकर पकड़ना मुझे एक असीम सुख देता है ,
बच्चा तेरे माथे का हरेक चुम्बन मुझे फिर से एक अतृप्त लालसा से भर देता है, और जब तेरी उंगलियां मेरे चेहरे को खरोचने की असफल कोशिश करती है ,वात्सल्य से मेरे पूरा हृदय ओतप्रोत हो जाता है।
मुझे नहीं पता था कि ये विचित्र सा बदलाब मेरे अन्दर इतनी तीव्रता से होगा लेकिन तेरे अलावा अब कुछ नहीं दिखता मुझे अपने आसपास ,दिल करता है हमेशा तुझे देखता रहूं।
आज जब तेरी पहली दीवाली है, सारे लोग मस्ती कर रहे, और तू ,तेरी मां खुद घर से बाहर है, उसी समय तुझे छोड़कर आना मेरे जीवन की सबसे बड़ी लड़ाई में से एक है।तेरा वो पलकें मटका मटका कर मुझे देखना ,अभी भले तू नहीं समझ पाई है लेकिन एक दिन तुझे इस एहसास से रुबरु करवाऊंगा ,मै तू और तेरी मां मिलकर इस क्षण को फिर से जिएंगे तेरे बोध होने के बाद ,अभी तो तेरे शैशव के हरेक लम्हे को जीना सबसे उत्कृष्ट भेंट है ईश्वर की।
क्या करूं, मजबूर हूं कि तुझे और देर तक नहीं जी पा रहा..
पता नहीं और कितनी कुर्बानियां बाकी है मुझे देनी इस वर्दी की।
जितने भारी मन से आज तुझे वापस रखकर आया हूं फिर कभी किसी को अपने बच्चे को इस कदर छोड़कर न जाना पड़े ।
लेकिन हां पता है मुझे तू भी इतनी मजबूत बनेगी जितनी तेरी मां है,आखिर तू है भी तो एक सोल्जर की बेटी।
जल्दी मिलते हैं मेरी जान।
पापा लव्स यू।
दीवाली 2024
अक्टूबर 31
#मेमोरी
सत्यम।
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