अंतिम आलिंगन

आलिंगन: हृदय जब प्रेम से परिपूर्ण होता है तो बरबस ही आलिंगन की ओर उन्मुख हो उठता है। 

सिर्फ भौतिक शरीर का मिलना ही नहीं होता आलिंगन......हृदय मिलते हैं भावनाएं एकजुट होती हैं विचारधाराएं किसी बिंदु पर जाकर एकाकार हो जाती हैं और टूटते हैं वो सारे कड़वाहट से भरे पल जो किसी बुरे दौर में उन कोमल मानस पटल पर उभर आए थे।

एक आलिंगन जो तुमसे मिला ,जब भी मां पापा के डर से भागे हमेशा तुम्हारा ममतापूर्ण और वात्सल्यपूर्ण आलिंगन हमारा इंतजार करता मिला।अपने अशक्त और छोटे छोटे हाथों से जब भी मेरे आलिंगन की पकड़ ढीली होती दिखी तुम्हारे हाथो ने ब्रम्हरंध पर आकर ये बता दिया की सुरक्षा कवच से तुम लैस हो चुके हो।

बहुत सारी रातें बिताई हैं न मैने तुम्हारी आगोश में ,कितनी ही कहानियां ,गीत और प्रभातकाली सुन सुन कर बड़ा हुआ हूं, कुछ तो अभी भी याद हैं और कुछ धुंधले धुंधले से तैरते हैं आंखो के सामने , जिनको चाहकर भी पढ़ नहीं पाता हूं।

जितना स्नेह और दुलार तुमसे मिला ,शायद मां से भी ज्यादा इसीलिए तो उत्तरार्ध में मैंने तुम्हे माई कहकर बुलाना प्रारंभ कर दिया था ।टोका भी था कुछेक ने फिर भी ...मेरा दिल कहता था तो मैंने इसी नाम से बुलाया था तुमको ,आखिर तुमने कभी प्रश्नचिन्ह नही लगाया और मैने भी , आपस का रिश्ता था हम दोनों ने ही जोड़ लिया था खुद को इससे ।

हमेशा से सौम्य और शांत प्रवृत्ति तुम्हारी,जो किसी को भी आकर्षित करने में समर्थ थी,किसी भी तथ्य को समझने में जितनी गंभीरता तुमने हमेशा दिखाई वस्तुतः में अनुकरणीय है।
गृहस्थी का इतना सम्मान शायद फिर कहीं नहीं दिखा मुझे जितना तुमने दिया ,अपना सारा जीवन अपने घर को व्यवस्थित करने,सहेजने और समेटने में लगाया l मई जून की तपती दोपहरी में जब सारा मोहल्ला नींद में बेहोश रहता था तब भी मैने तुम्हे कुछ न कुछ सृजनात्मक करते ही पाया ।

जीवन का उत्तरार्ध हमेशा कष्टमय ही होता है ,विगत एक वर्ष से घर से आते समय हमेशा ये डर लगता था कि शायद इस बार अंतिम मिलना हो और फिर सच में ये अंतिम आलिंगन...

शोक है !बिलकुल है ,अपने एक अजीज को खोने का ,मातृसता का एक नायाब मोती के गिर जाने का ,अपने घर का सबसे पुराना इतिहास गुम हो जाने का ,परंतु हर्ष भी है की साथ मिला तुम्हारा ,तुम्हारे पास कटा है जीवन का ये पूर्वार्ध.....
 खोखला नही रहने दिया बचपन मेरा बल्कि तुम्हारी कहानियों और शिक्षाओं  ने इसको बिल्कुल ठोस बनाया है ।

फिर मिलने की आकांक्षा रहेगी , पता नही कब ,कहां,और कैसे  फिर भी .....
अलविदा दादी...

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